यहाँ से जानिए, उत्तराखंड के दिल हल्द्वानी नैनीताल के कालाढूंगी चौक पर शौर्य और शहरी विकास का नया चिन्ह (शहीद स्मारक) –महावीर चक्र विजेता मेजर राजेश अधिकारी (Major Rajesh Adhikari) के बलिदान की कहानी...🌺🌹
उत्तराखंड राज्य वीरता, संस्कार और उन्नत विकास की भूमि है। यहाँ के सैनिकों की बहादुरी पूरे भारत के लिए प्रेरणा है। हल्द्वानी, नैनीताल जिला का प्रमुख शहर, हमेशा से पर्यटन, शिक्षा और व्यापार के लिहाज से खास रहा है। अब उत्तराखंड की शौर्यगाथा को अमर करने के लिए, कालाढ़ूंगी चौराहे पर ‘मेजर राजेश अधिकारी महाद्वी चैक’ स्मारक बनने जा रहा है।
🥇 महावीर चक्र (Mahaveer Chakra) :
महावीर
चक्र भारत
का दूसरा सर्वोच्च सैन्य सम्मान है, जो युद्ध के दौरान दुश्मन की मौजूदगी में असाधारण
वीरता और बलिदान के लिए दिया जाता है। यह परमवीर चक्र के बाद आता है।
🏅 मेजर राजेश अधिकारी (Major Rajesh Adhikari) – उत्तराखंड के सैनिकों का गौरव :
मेजर राजेश अधिकारी भारतीय सेना के बहादुर अधिकारी थे, जिन्होंने देश के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। उत्तराखंड के युवा हमेशा से सेना में भर्ती और देश सेवा के लिए जाने जाते रहे हैं। अब हल्द्वानी में बनने वाला ‘मेजर राजेश अधिकारी स्मारक’ इनकी वीरता को सहेजकर नई पीढ़ी को प्रेरित करेगा।
🥉 कारगिल युद्ध (OP Vijay) : 30 मई 1999 :
🚺 जब Jammu aur Kashmir के कारगिल क्षेत्र में पाकिस्तान सेना द्वारा समर्थित घुसपैठियों की योजनाबद्ध घुसपैठ के कारण भारी लड़ाई छिड़ गई, तो भारतीय सेना को उन घुसपैठियों से पहाड़ियों को खाली कराने का आदेश दिया गया। पहला बड़ा अभियान उन सैनिकों द्वारा शुरू किया गया जिन्होंने घुसपैठियों से क्षेत्र को मुक्त कराने के लिए तोलोलिंग पर हमला किया। ऑपरेशन विजय के 25 मई को प्रारंभ होने के बाद, जब क्षेत्र में गश्त कर रहे लेफ्टिनेंट सौरभ कालिया लापता घोषित किए गए, सैनिकों को दुश्मन पर हमला करने का आदेश दिया गया।
🚺 दिनांक 30 मई 1999 को, तोलोलिंग फीचर को कब्जे में लेने के बटालियन अभियान के हिस्से के रूप में, Major Rajesh Adhikari, जो 18 ग्रेनेडियर्स से संबद्ध थे, को दुश्मन के दृढ़ गढ़वाले अग्रिम मोर्चे को कब्जे में लेकर प्रारंभिक आधार सुरक्षित करने का कार्य सौंपा गया। यह पोस्ट लगभग 15,000 फीट ऊँचाई पर दुर्गम, बर्फ से ढके पहाड़ी इलाके में स्थित थी। उस रात उन्होंने और दस सदस्यीय ग्रेनेडियर्स दल ने कुल्हाड़ी और पिक के सहारे अपने लक्ष्य की ओर चढ़ाई शुरू की। मेजर राजेश अधिकारी तीन दस सदस्यीय टीमों के केंद्रीय भाग का नेतृत्व कर रहे थे, जो एक बंकर कब्जे में लेने की कोशिश कर रही थीं। मेजर राजेश अधिकारी (Major Rajesh Adhikari) अपने जवानों से तीन मीटर आगे बढ़ते हुए केंद्रीय दल का नेतृत्व कर रहे थे। बंकर पर कब्जा हो गया, लेकिन मेजर अधिकारी अपने लक्ष्य से बीस मीटर पहले गोली लगने से घायल हो गए। उन पर दो परस्पर समर्थन देने वाले बंकरों से मशीन गन से गोलियां चलाई गईं। उन्होंने तुरंत रॉकेट लॉन्चर दल को बंकर पर हमला करने का आदेश दिया और बिना किसी देरी के स्वयं बंकर में घुसकर दो घुसपैठियों को नजदीकी मुकाबले में मार गिराया।
🚺 इसके बाद उन्होंने अपने मीडियम मशीन गन (एमएमजी) दल को चट्टानों के पीछे स्थिति लेने और दुश्मन पर फायर करने का आदेश दिया। हमला दल धीरे-धीरे अपने लक्ष्य की ओर बढ़ता गया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद मेजर अधिकारी अपने सैनिकों को लगातार निर्देश देते रहे और फायर का नेतृत्व करते रहे। निकासी से इनकार करते हुए, उन्होंने दूसरे बंकर पर धावा बोला और एक और घुसपैठिये को मार गिराया, जिससे तोलोलिंग के दूसरे बंकर पर कब्जा हो गया, जिसने बाद में प्वाइंट 4590 को कब्जे में लेने का मार्ग प्रशस्त किया। मेजर राजेश अधिकारी (Major Rajesh Adhikari) ने घुसपैठियों को भारी क्षति पहुँचाई और उन्हें पीछे हटने पर मजबूर किया, इससे पहले कि वे अपने घावों के कारण वीरगति को प्राप्त हुए। तोलोलिंग की लड़ाई सबसे महत्वपूर्ण लड़ाइयों में से एक थी, जिसमें मेजर अधिकारी ने बहादुरी से लड़ते हुए अपने प्राणों की आहुति देकर विजय प्राप्त की। Major Rajesh Adhikari एक साहसी सैनिक और दृढ़ निश्चयी अधिकारी थे जिन्होंने अग्रिम पंक्ति से नेतृत्व किया और अपने कर्तव्य का पालन करते हुए बलिदान दिया।
🥇 नैनीताल जिला के कालाढूंगी चौक – हल्द्वानी नैनीताल शहर का नया ऐतिहासिक स्थल :
हल्द्वानी के कालाढूंगी रोड का चौक, यातायात
और मिलन स्थल के रूप में महत्वपूर्ण है। इसी अहम स्थान पर शहर को आधुनिक रुप और गौरव देने हेतु नया स्मारक बनाया जा रहा है। इस स्मारक के निर्माण से स्थानीय लोगों की पहचान मजबूत होगी, और
यहाँ आने वाले पर्यटक भी इस ऐतिहासिक स्थल के जरिये उत्तराखंड सैनिकों की शौर्यगाथा जान पाएंगे।
🥇 शहरी विकास योजना में शहीद स्मारक का स्थान :
उत्तराखंड सरकार की ‘Integrated Urban Infrastructure Development
Project’ (IUIDP-AF) के तहत इस स्मारक का निर्माण किया जा रहा है। प्रदेश में शहरी विकास, इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट, हरित क्षेत्र और यातायात सुव्यवस्था हेतु कई योजनाएँ चलाई जा रही हैं। मेजर राजेश अधिकारी शहीद स्मारक भी इसी योजनाबद्ध विकास का हिस्सा है, जिसमें
सौंदर्यीकरण और यातायात सुविधा दोनों का ख्याल रखा गया है।
🥇 महावीर चक्र के शहीद स्मारक से स्थानीय समाज में सम्मान और प्रेरणा :
उत्तराखंड शहीद स्मारक केवल पत्थर या मूर्ति ही नहीं हैं, यह
समाज की भावना, प्रेरणा
और सम्मान का प्रतीक हैं। हल्द्वानी के नागरिकों को उनके स्थानीय सपूत सैनिकों के नाम पर स्मारक होना गर्व की बात है। इससे इलाके के युवाओं को सेना व देश
सेवा का संदेश मिलेगा, और
आपके बच्चों को अपने शहर के गौरवशाली इतिहास से परिचित कराने का अवसर मिलेगा।
🥉 शहीद स्मारक के फायदे :-
📌 पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
📌 युवाओं के लिए देशभक्ति व प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
📌 स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।
📌 शहरी सौंदर्य बढ़ेगा और यातायात प्रबंधन बेहतर होगा।
कैसे होगा शहीद स्मारक का निर्माण ?
कार्यालय कार्यकारी अभियंता, निर्माण खंड, लोक निर्माण विभाग, हल्द्वानी द्वारा पत्र के अनुसार, जिले के अधिकारी, परियोजना प्रबंधक और शहरी विकास टीम इस स्मारक के लिए आवश्यक कार्यवाही को अंजाम देंगे। यह शहीद स्मारक आधुनिक डिज़ाइन के साथ शहीद मेजर राजेश अधिकारी के नाम पर स्थापित होगा।
🥇 स्थानीय लोगों की प्रतिक्रियाएँ :
स्थानीय समाज में इस खबर को बेहद खुशी और गर्व से स्वीकारा गया है। हल्द्वानी निवासियों को लगता है कि इससे उनका क्षेत्र, इतिहास
और सैन्य गौरव देशभर में पहचाना जाएगा। व्यापारियों और पर्यटन व्यवसायियों का कहना है कि शहीद स्मारक से आमदनी और रोजगार में भी इज़ाफ़ा होगा।
निष्कर्ष : कालाढ़ूंगी चौक पर मेजर राजेश अधिकारी, महावीर चक्र, शहीद स्मारक सिर्फ स्मरण स्थली नहीं, बल्कि उत्तराखंड की शौर्यगाथा और आधुनिक शहरी विकास का मिलाजुला प्रतीक बनने जा रहा है। स्मार्ट सिटी अभियान, शहरी सौंदर्यीकरण और सैनिकों की सम्मान यात्रा में यह स्थान हल्द्वानी को नया गौरव और पहचान दिलाएगा।
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